रामपुर में सीएचसी की घोषणा केवल घोषणा मात्र तक सीमित

रामपुर बुशहर l मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा रामपुर में पीएचसी रामपुर का दर्जा बढ़ाकर सीएचसी करने की घोषणा हुए लगभग 6 माह होने बाद भी अभी तक यह घोषणा मात्र घोषणा ही बन कर रह गई है l जिससे मरीजों व उनके अभिभावकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है l
बताते चलें की 21 वर्ष पूर्व रामपुर से रेफरल हॉस्पिटल को बदलकर यहां से 6 किलोमीटर दूर खनेरी ले जाया गया था l उसके बाद रामपुर में सीडी खोली गई थी l मरीजों की संख्या को देखते हुए इस सीडी का दर्जा बढ़ा कर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तो कर दिया पर चाहे कांग्रेस की सरकार रही या भाजपा की यहां पर पीएचसी लेवल की कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं की गई है l हिमाचल प्रदेश में सम्भत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र होगा जहां पर मरीजों को भर्ती होने की सुविधाएं भी नहीं है, और नहीं ही ऑपरेशन थेटर, एक्सरे ओर रोग के टेस्ट की सुबिधा है l जिसके चलते लोगों को भारी खर्चा का निजी क्लीनिक क्लीनिकों से टेस्ट ओर एक्सरे करवाने पर मजबूर होना पड़ रहा हैl रामपुर के हॉस्पिटल का आधे से ज्यादा भवन आयुर्वेदिक विभाग और सराय के लिए दे दिया गया है lजिस कारण यहां पर जगह के अभाव से मरीजों के भर्ती होने की सुविधा नहीं है ना ही प्रयोगशालाओर एक्सरे है l
गौर हो की रामपुर मैं हॉस्पिटल के पुराने भवन के साथ ही आयुर्वेदिक हस्पताल का बहुमजिला भव्य भवन लगभग 4 वर्ष पूर्व बन कर तैयार हो चूका है और आयुर्वेदिक हॉस्पिटल भी नए भवन मैं शिफ्ट हो चूका है l लोगों की मांग के बावजूद और सरकारी आदेशों के बावजूद भी आयुर्वेदिक विभाग ने 3 वर्षों बाद अभी तक ना जाने क्युओं यह कमरे एलोपैथिक विभाग को नहीं सौंपा l जिसके चलते सारी दिक्क़ते मरीजों को झेलनी पड़ रही है l
प्रदेश सरकार लोगों को स्वास्थ्य सुविधा देने के बारे दावे तो करती है परंतु रामपुर पीएससी से एक डॉक्टर का पद भी समाप्त कर देने से भी मरीजों को चेकअप करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है l पीएचसी मैं केवल 1 ही डॉक्टर है l इस पीएससी में ना केवल रामपुर क्षेत्र से बल्कि साथ लगते जिला कुल्लू की तहसील निरमंड के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा के लिए आते हैं l वर्ष 19- 20 मैं इस पीएचसी मैं मरीजों की संख्या 40- 42 हजार रही जोब घट गई है l वर्तमान मैं छोटी मोटी छोटे के इलाज को भी 6 किलोमीटर दूर खनेरी जाना पड़ता हैl रात को तो स्थिति और भी गंभीर हो जाती है जबकि गंभीर स्थिति में मरीजों को, छोटी मोटी चोटिल होने तथा डिलीवरी के लिए चिकित्सा सुविधा के लिए 6 किलोमीटर दूर खनेरी अस्पताल जाना पड़ता है l रात को टैक्सी व थ्री व्हीलर उपलब्ध नहीं होते तो रोगी को इलाज मैं देरी भी हो जाती है lअगर टैक्सी इत्यादि मिल भी जाए तो मनमाना किराया वसूल करते हैं l
लोगों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि रामपुर पीएचसी को शीघ्र सीएचसी बना दिया जाए यहां पर जगह की भी कोई कमी नहीं है केवल आयुर्वेदिक विभाग द्वारा बिना कारण कब्जा किए गए ऐलौपैथी हस्पताल के भवन को खाली करवाना है l

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