रामपुर बुशहर 22 फरवरी
द सुप्रभात
देवता साहिब दोगणू जी की नवनिर्मित कोठी में प्राण प्रतिष्ठा के शुभ अवसर पर देवी-देवताओं का भव्य स्वागत, और खंटू के साथ दिव्य मिलन ने श्रद्धा, भक्ति और परंपरा
मंदिर कमेटी की ओर से देवता दोगणू महाराज ने परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ एक-एक कर सभी आमंत्रित देवताओं का माता मंगला काली मंदिर परिसर के बाहर विधिवत स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों की गूंज और वाद्ययंत्रों की मंगल ध्वनियों के बीच देवता और देवलू नृत्य करते-गाते मंदिर प्रांगण तक पहुंचे। पूरा क्षेत्र ‘देव मिलन’ के उल्लास से गूंज उठा। इससे पहले जाइयों और भांजों का भी देवता दोगणू महाराज ने स्नेहपूर्वक अभिनंदन किया।
हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने इस ऐतिहासिक देव मिलन के साक्षी बनकर स्वयं को धन्य महसूस किया। कई श्रद्धालु इस भावनात्मक क्षण में भावुक भी हो उठे। मंदिर समिति के उपप्रधान मनीष शर्मा ने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान में भाग लेने वाले सभी देवताओं का स्वागत प्राचीन देव परंपराओं के अनुरूप विधि-विधान से किया गया। ढोल-नगाड़ों की थाप, रणसिंघा और अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ध्वनि ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया
समारोह में चार ठहरी के प्रमुख देवताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें देवता दमुख डंसा, देवता साहिब जाहरूनाग शनेरी, देवता साहिब यज्ञेश्वर शिंगला, देवता कालेश्वर छिज्जा देवठी, देवता नरेशर लक्ष्मी नारायण कुमसू, देव जाख रचोली, लक्ष्मी नारायण देवता दरकाली, खंटू देवता साहिब सेरी मझाली तथा देवता थेडा महासू प्रमुख रूप से शामिल रहे। इन सभी देवताओं की उपस्थिति से समारोह की शोभा और भी बढ़ गई।
आज होगी शिखा पूजन और ‘फेर’ रस्म
रविवार को मंदिर की शिखा पूजन और ‘फेर’ रस्म होगी। इसके तहत नवनिर्मित मंदिर की छत पर चारों दिशाओं की विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी। धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजन के पश्चात कलश स्थापना की जाएगी, जो मंदिर की पूर्णता और आध्यात्मिक ऊर्जा के प्रतिष्ठापन का प्रतीक मानी जाती है। सोमवार को समारोह के समापन अवसर पर जाइयों, भांजों और आमंत्रित देवताओं को पारंपरिक धार्मिक विधियों के साथ सम्मानपूर्वक विदाई दी जाएगी। इस प्रकार कई दिनों तक चले इस भव्य प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का समापन

